Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -26-Sep-2022

भावना

यहाँ क्यों बैठी है रे, आरती और स्नेहा के साथ जाकर खेलती क्यों नहीं ? ’’
’’ खेलने का मन नहीं करता है। ’’ भावना की इस बात पर उसकी माँ की भौंहे तन गई, भावना की माँ कामना ने भौंहें उचका कर कहा ’’ अच्छी बात है, जब खेलने का मन नहीं कर रहा है तो घर का ही काम कर ले। तुम्हारा मन भी लगा रहेगा। ’’
’’ माँ, घर का भी काम अभी नहीं करना है। ’’ भावना की इस बात पे उसकी माँ ने झल्ला कर कहा ’’ सिर्फ सोचती ही रहेगी, बैठी-बैठी सोचती रह। ’’
ध्यानमग्न भावना के मन-मस्तिष्क में ढेर सारे सवाल उमड़े, कुछ का जवाब भावना को खुद से ही मिल गया  और कुछ सवालों का जवाब खुद से नहीं मिला। जवाब ने मिले सवाल , भावना के मन-मस्तिष्क में उधम मचाते रहे। भावना उन सवालों में उलझती ही रही।
स्नेहा को भावना का चु प रहना खला। स्नेहा को लगा कि इसके मन के अन्दर की बात को निकाला जाए, कुछ तो जरूर है, नहीं तो इतनी चंचल लड़की शांत क्यों बैठी है ।
स्नेहा ने भावना से पुछा ’’ क्या बात है भावना, चुप-चाप  सी क्यों रहती है, हमलोगों के साथ खेलती भी नहीं है। ’’
स्नेहा के ललाट पर बल पड़े, स्नेहा ने पुछा ’’ कहीं कोई पसन्द तो नहीं आ गया ? ’’
भावना के चेहरे पर शरम की लाली पसर गई, भावना ने कहा ’’ नहीं रे, कैसी बात करती है। ’’
’’ तो बता न, क्या बात है। ’’
भावना ने कहा ’’ तु बताएगी तो नहीं किसी को ? वैसे तो धीरे-धीरे सबको मालुम चल ही जाएगा, पर तु अपने तक बात रखना। ’’
’’ हाँ हाँ जरूर, क्यों नहीं। ’’
बताउं कि न बताउं, दुविधा को म नही मन भरकर भावना ने कहा ’’ मैं अपने समाज और अपने देश के लिए कुछ करना चाहती हुँ और हमको लगता है कि मैं कलक्टर बन सकती हूँ। ’’
स्नेहा, भावना की  तरफ देखती रह गई और अपनी हँसी को रोक कर बोली ’’ ये तो और भी अच्छी बात है, इसमें छुपाने या शरमाने वाली कौन सी बात है। ’’
ऐसा होता है कि जब तक कोई बात आप तक ही सिमित है तो दुविधा का बना रहना संभव है, मगर जब अपनी बात किसी अपने के समिप रख देते हैं तो दुविधा कम होने काक और उस बात की पुष्टि होने का प्रमाण पत्र मिल जाता है।
भावना भी ऐसा ही महसूस कर रही थी, वो अपना लक्ष्य अपनी प्रिय सहेली को बताकर स्वयं पे गर्व का अनुभव कर रही थी।
घर से निकलने के बाद भावना और स्नेहा आमने-सामने खड़ी थी, आरती भी खड़ी थी और भी दो-तीन लड़कियां खड़ी थी।
आरती ने ताली बजाना शुरू किया तो स्नेहा को छोड़कर और भी लड़कियां, भावना को देख कर ताली बजाने लगी। आरती ने कहा ’’ खबरदार, होशियार, हमारी सदाबहार सहेली, मेरा मतलब है, कलक्टरनी साहिबा पधार रही है। ’’ भावना आश्चर्यचकित थी और स्नेहा को छोडकर तीनो लड़कियां  ठहाका लगाकर हँस पड़ी।
भावना ने आँखें कड़ी कर स्नेहा की तरफ देखा तो स्नेहा भी ठहाका लगा कर हँस पड़ी। भावना, स्नेहा की बेवकुफी से आहत हुई थी।
लड़कियों को ठहाका लगाकर हँसती हुई देखकर पास से गूजरते हुए बनवारी काका ने टोक कर पुछा ’’ काहे हँस रही हो बिटीया लोग। ’’
आरती ने कहा ’’ हमारी भावना कलक्टरनी बनेगी। ’’
बनवारी काका ने आरती को डाँट कर कहा ’’ चुुप हो जाओ, इसमें हँसने वाला कौन सा बात है। ’’
बनवारी काका ने भावना से कहा ’’ भावना में बहना अच्छा बात नहीं है।ं ’’ वहाँ से दुर होते ही बनवारी काका भी ठहाका लगा कर हँस पड़े, और हँसते हुए खेत पे सबको बताया।
भावना कोे गुस्सा तो बहूत आया मगर उस गुस्सा को उसने अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया। शुरू में उसकी अपनी दुविधाओं और आशंकाओं ने जो कि भावना की ही मानसिक उपज थी, रोका मगर कम समय के लिए।
भावना के पिता ने कहा ’’ जीद्द क्यों कर रही है ? सब लोग मजाक उड़ा रहे हैं बेटी। ’’
भावना की माँ जो शुरू में तो भावना को रोकती थी, मगर भावना की दृढ़ इच्छाशक्ति को भांपकर उसका पक्ष लेकर बोली ’’ मेरी बेटी है जीद्द तो करेगी ही, हमको अपनी बेटी पे पूरा भरोषा है। ’’
अपनी कड़ी मेहनत से मैट्रिक की परीक्षा में अव्वल आने के बाद भावना ने सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ठ किया।
फिर एक बार बोलने वालों की आवाज बुलंद हुई ’’ भावना, भावना में बही जा रही है। ’’
मगर भावना ने किसी की बात पे ध्यान नहीं दिया और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयास से भावना ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में उत्कृष्ठ स्थान लाकर कलक्टर बनी।
कलक्टर की कुर्सी पर बैठते हुए भावना ने कहा ’’ भावना में ही संभावना है, सब को यह बात मान लेनी चाहिए । ’’


समाप्त

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4 Comments

shweta soni

27-Sep-2022 11:32 AM

Lajawab 👌

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Rajeev kumar

27-Sep-2022 08:07 PM

thanks

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Gunjan Kamal

26-Sep-2022 11:20 PM

प्रेरक कहानी 👏👌🙏🏻

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Rajeev kumar

27-Sep-2022 08:02 AM

thanks

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