लेखनी प्रतियोगिता -05-Oct-2022
जब जिंदगी ने साथ छोड़ा तो तेरा किरादार नजर आया
जब हमने हाथ किताबों का थामा तो फ्यूचर नजर आया
चल दिया फिर उसी गली
जिस गली को है मुह मोड़ आया
की अब तालाबदारी है हकीम को पैसों की
किसे फर्क पड़ता है मुझे मार आया
रहम खुदा की जिंदा हुआ नहीं
फिर भी जमाने के सामने नजर आया
हूं तो मैं विशाल मगर क्या करे
कमी रह गई मुझमें फिर भी उभर आया ।।
@शायर विशु किंग
Raziya bano
10-Oct-2022 09:25 PM
Shaandar rachna
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Suryansh
07-Oct-2022 08:28 AM
बहुत ही उम्दा
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SHAYAR VISHU KING
06-Oct-2022 03:44 PM
बेहतरीन रचनाएं लिखने का प्रयास करता हूं बाकी आप सब का आभार जो हमे सिखलाते है । शुक्रिया ♥️🙏
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