Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -09-Oct-2022

चाहे हज़ार बंद हो रस्ते 
खुल ही जायेंगे 
कांटे बिछे राहों से भी 
सलामत निकल ही जायेंगे 
कोहरे से अगर न दिखे रास्ता 
थोड़ी दूर तो टहल ही आएंगे .

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6 Comments

Pratikhya Priyadarshini

10-Oct-2022 08:09 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति 👍👌

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Muskan khan

09-Oct-2022 06:51 PM

Very nice 👌

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Sachin dev

09-Oct-2022 06:34 PM

Nice 👍👍

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