लेखनी प्रतियोगिता -29-Oct-2022
मोहब्बत की ये बेरुखी लगता है कि अब तुम मेरे कभी हो नहीं पाओगे
मैं तुम्हे चाहता हूं सनम, लगता है कि अब दोबारा कभी हमे मिल नहीं पाओगे
चले थे जिस राह जिस गली मोड़ पर तुम कभी दिखोगी पता नहीं
हम तो होंगे जिंदा मगर तुम हमे देख नहीं पाओगे
इश्क़ सिर्फ एक तरफा था तुम भी कहोगे
जब नफरत की रह से गुजर कर तुम जी नहीं पाओगे
कि अशल मे अदावत तो सिर्फ तूमने किया था
तुम हमारा नजर आंदाज कारना सह नहीं पओगे
मैंने जीतनी गहराइयों सें तुम्हें लिखा हैं जानम
मेरी ग़ज़ल सुने बगैर तुम रह नहींं पाओगे ।।
Gunjan Kamal
12-Dec-2022 02:40 PM
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻
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