जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तुत कविता
गोकुल की गलियों में
रास रचाते गिरधारी
माता यशोदा के लाल
मेरे मदन मुरारी
ग्वाल बाल के संग खेलें खेल बनवारी
हर गलियों में बांसुरी बजाए
ओ मेरे कृष्ण कन्हाई
राधा मोहन के बांसुरी की थी दीवानी
ग्वाल बाल सब साथ गाय भी कराती थी सवारी
बड़े नटखट थे मेरे श्याम बिहारी
माखन के दीवाने थे हमारे
बलिहारी
गोपियों की मटकी फोड़े
हमारे कृष्ण कन्हाई
इनकी लीलाओं धन्य हो गई थी ये धरती
जब बंसी बजाए मोहन कट जाए रात काली
यमुना तट किए काले नाग की सवारी
गोकुल वासियों को नृत्य कर दिए बधाई
प्रभु की लीला देख पुलकित हुए सब बृजवासी
कैसे रास रचाते हैं बलदाऊ के भाई
प्रेम के प्रतीक हैं कृष्ण व राधा रानी
मानवता की पहचान है हमारे बृजवासी
प्रभु ने जन्म लेकर इस धरा को भी तार दिए
मानव का क्या अंबर को भी
जीवन दान दिए
पंडित अमित कुमार शर्मा
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
मो.8707290713
Swati chourasia
30-Aug-2021 06:46 PM
Very beautiful 👌👌
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Niraj Pandey
30-Aug-2021 06:17 PM
वाह
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ऋषभ दिव्येन्द्र
30-Aug-2021 06:10 PM
बहुत ही सुन्दर रचना 👌👌
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