आन
भारती की आन,बान,शान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए!
मुल्क कोई हमे कमज़ोर ना समझे!
संदेशा है सारे इस जहान के लिए!!
भारती के वीर कभी डरते नहीं हैं!
मारने से पहले कभी मरते नहीं हैं!
चिंता नही करते अपनी जान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए!
पैंसठ या इकहत्तर जो भी युद्ध हुआ है!
हिंद का सैनानी तब- तब क्रुद्ध हुआ है!
कूंच किया फौरन जंगे मैदान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए!
कारगिल भी हमारे ऊपर थोपा गया था!
बीज एक भीषण युद्ध का रोपा गया था!
फौजी चल पड़े थे घमासान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए
चीन की हर चाल को नाकाम किया है!
सीधे सीधे बौनों को पैगाम दिया है!
उलझे तो जाओगे कब्रिस्तान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए!
एक और गलती तुम्हे भारी पडेगी!
चाल जो चलोगे उल्टी सारी पडेगी!
अंतिम है संदेशा पाकिस्तान के लिए!
आज फिर लिखेंगे हिंदुस्तान के लिए!!
हर्ष जैन सहर्ष
Miss Lipsa
31-Aug-2021 09:48 PM
Wow
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