चेहरे पे चेहरा चढ़ा, जनता है अनजान,
राजनीति के सत्य का, तोते को है ज्ञान,,
भेद छिपा क्या पेट मे, ये जाने है कौन,,
चढ़ अमुआ की डाल पे ,तोता बैठा मौन ,,
डाढ़ी आए थोन्द पे, जटा जूट कर धार,,
तोता साधू बन करे ,देश का बंटाढार,,
तोता ने कविता लिखी, पाने को सम्मान,,
पर मंचो के सत्य से ,तोता था अनजान
मत दाता तोता बना, जन्म सिद्ध अधिकार,,
सांसद जी के प्रेम का ,वोट मात्र आधार,,
सांसद जी है बाटते, मदिरा का उपहार,,
तोता लाइन मेलगा , लेकर के आधार,,
Gopal Gupta
Gunjan Kamal
24-Nov-2022 09:02 PM
👏👌
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