नज़र तुम्ही पर अटक रही है,
ये बात सब को खटक रही है,,
उधर दिखा है चमन में भंवरा,
कली जहाँ पर चटक रही है,,
जो मुझ को देखा तो मुस्कुरा कर ,
वो ज़ुल्फ़ अपनी झटक रही है,,
जो बात उस की नहीं है मानी,
वो पाँव अपने पटक रही है,,
वो रूठ कर है पता नहीं अब,
कहाँ पे जाने भटक रही है,,
कोई ख़बर दो गोपाल उस की,
कि साँस लगता अटक रही है,,
Khan
28-Nov-2022 09:43 PM
Bahut sundar 👌🌸
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Gunjan Kamal
28-Nov-2022 07:14 PM
बहुत ही सुन्दर
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डॉ. रामबली मिश्र
27-Nov-2022 08:50 AM
Nice
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Gopal Gupta
28-Nov-2022 01:24 PM
Thanks
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