Amit Kumar

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भलाई

शीर्षक ❤️ भलाई ❤️


तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं मांगी थी
कैद मांगी थी रिहाई तो नहीं मांगी थी।

मैंने क्या जुल्म किया आप खफा हो बैठे
 प्यार मांगा था जुदाई तो नहीं मांगी थी।

मेरा हक था तेरी आंखों की झलकती मय पर
 चीज़ अपनी थी पराई तो नहीं मांगी थी।

चाहने वालों को तूने सिर्फ सितम ही दिया
 तेरी महफिल में रुसवाई तो नहीं मांगी थी

दुश्मनी की थी अगर वह भी निभाता जालिम
 तेरी हसरत में भलाई ही तो मांगी थी

अपने दीवाने पर इतने भी सितम ठीक नहीं तेरी उल्फत में बुराई तो नहीं मांगी थी।

पंडित अमित कुमार शर्मा
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
मो.8707290713

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5 Comments

Niraj Pandey

02-Sep-2021 12:01 PM

वाह

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Seema Priyadarshini sahay

01-Sep-2021 08:39 PM

बहुत सुंदर रचना।

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Miss Lipsa

01-Sep-2021 08:37 PM

Wow

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