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ममता



ममता :
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कोई नहीं है इस धरती पर,उस अम्बर की छांव मे,
बहुत सुकून से रहते हें मां,तेरे आंचल की छांव में।

अम्बर सा मां तेरा आंचल ज्यों वितान लहराया  हो,
या फ़िर आ कर स्वर्ग‌लोक से ईश्वर न ख़ुद मां का परचम फ़हराया हो।

अपरिमेय फैला हो जग पर हर पल तेरा कृपा वितान,
मां तेरी ममता की आभा व्याप्त हो रही बन अनजान।

क्या पशु-पक्षी क्या नर-नारी सबको मिलता तेरा साथ,
दया क्षमा ममता की सागर सबको मिलता‌ तेरा हाथ।

जगत पिता ने मातृ शक्ति को यूं धरती पर भेजा है,
खुद अपने सारे गुण दे कर धरती का भार सहेजा‌ है।

मां ही ईश्वर मां ही मानव,मानवता की मूर्ति विशाल,
मां‌ तेरा उर शरण- स्थली अद्भुत कोमल बाहु मृणाल।

अनुपम कोमल मां तेरा दिल अतुलनीय है मधुबन है,
शत शत नमन करें हम मां को तेरे आंचल की‌ छांव मे
जीवन है।

आनन्द कुमार मित्तल, अलीगढ़



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4 Comments

Gunjan Kamal

03-Dec-2022 12:48 PM

बहुत खूब

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Punam verma

03-Dec-2022 08:02 AM

Nice

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Abhinav ji

03-Dec-2022 07:32 AM

Very nice👍👍

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