लेखनी प्रतियोगिता -03-Dec-2022
1)सपनो की दुनिया
कुछ सपनो को जो पंख दिये
वो खुले आसमान मे उड़ने लगे
बाद लो की छाव मिले
तो कभी तारो की महफिल सजी
नरम नरम हवा के पाल नो मे पलने लगे कोरे कोरे ये सपने रंगो
से खेलने लगे
चलते चलते खो गये
अपनी ही धड़कन से दुर हो गये
पीछे मुडे तो दिखा कहानी बन के बिकता
अपना ही चेहरा
2) पंख
सपनो के पंख होते है
इन मे चमकीले रंग होते है
कुछ सच्चे होते है
कुछ बेरंग भी होते है
सपने हसाते है
रु लाते भी है
मन मे उम्मीदे धुंध ला जाये
तो अनायास ही चेहरे पर
एक चमक सी भी ले आते है
-अभिलाषा देशपांडे
Raziya bano
03-Dec-2022 07:55 PM
Shaandar rachna ma'am
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Sachin dev
03-Dec-2022 04:26 PM
बहुत खूब
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Gunjan Kamal
03-Dec-2022 02:57 PM
शानदार
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