Gopal Gupta

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माहिया

माहिया

जीत और हार यही,,
इस को समझ पगले ,
संसार का सार यही,,


कागज़ की कश्ती है,
जीवन के मेले में,
 ये मौत न सस्ती है,,

दिनरात तड़पती है,,
मिलने को तुझसे,
अब रूह तरसती है,,

चाँद के जैसी सूरत,,
लगती है मुझ को,
 तू अजंता कि मूरत ,,

तुम नाम मेरा ले कर,
आवाज़ नहीं देना,
बदनामी का है डर,,

जब शाम ढले आना ,
अपनी बाँहो की 
 तुम माला पहनाना,,

बस इतना कहना है,
तुम से बिछड़ कर जाँ,
ना    ज़िंदा  रहना  है,,

उर की परिभाषा है,
ये  प्रेम मेरे प्रीतम,
आँखों की भाषा है,,

कह दो जो कहना है,
साथी हम तुम को, 
संग संग रहना है,,

अक्सर बरसातो में,
याद तेरी आये,
 इन तन्हा रातों में,,

सारी रात जगाती हैं,
यादें तेरी मुझे,
 हर पल तड़पाती हैं,,

 Goapl Gupta" Gopal "

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4 Comments

Raziya bano

03-Dec-2022 07:55 PM

Shaandar

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Arina saif

03-Dec-2022 06:25 PM

Nice

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Sachin dev

03-Dec-2022 04:25 PM

Superb

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