लेखनी कहानी -03-Dec-2022
स्त्री जीवन
स्त्री का जीवन
जैसे मझधार
स्त्री हे सब ला
ना रही वो अब ला
स्त्री के लिये बने कानून
स्त्री सम कोई ना दुसरा
स्त्री हे त्याग की मुरत
जिसकी देवी सम सुरत
करती रहती सबका भल्ला
अंत मे ना होता उसका विचार
कभी लक्ष्मी कभी यशोदा
बदलती रहती रुप अनेक
घरवालो के खुशी के खा तीर
झेलती रहती दु:ख अनेक
- स्वरचित
- अभिलाषा देशपांडे
-
Gunjan Kamal
04-Dec-2022 05:24 PM
बहुत खूब
Reply
Arina saif
03-Dec-2022 06:25 PM
Nice
Reply