लेखनी प्रतियोगिता -06-Dec-2022
प्रकृति
प्रकृति की लीला व्यारी
कही बरसता पानी बहती नदिया
कही उफनता समुद्र है
तो कही शांत सरोवर है
प्रकृति का रुप अनोखा कभी
कभी चलती साए साए हवा
तो कभी मौन हो जाती
प्रकृति की लीला न्यारी है
कभी सुखी धरा धुल उडती है
तो कभी हरियाली की चादर ओढ लेती है
प्रकृति की लीला न्यारी है
कही सुरज एक कोने मे छुपता है
तो दुसरे कोने से निकल कर चौका देता है
प्रकृति की लीला न्यारी है
कभी गगन नीला लाल पीला हो जाता है
तो कभी काले सफेद बादलो से घिर जाता है
प्रकृति की लिला न्यारी है
-अभिलाषा देशपांडे
Prbhat kumar
07-Dec-2022 11:40 AM
शानदार
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Punam verma
07-Dec-2022 08:38 AM
Very nice
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Abhinav ji
07-Dec-2022 07:35 AM
Very nice👍👍
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