लेखनी प्रतियोगिता -09-Dec-2022
*वैसे ही नजर आओ*
उसकी याद रखो, अपने दिल में तुम आबाद
हो जाओगे तुम, दुखों की दुनिया से आजाद
जश्न समझकर जब, हर लम्हे को बिताओगे
पतझड़ का मौसम, बहारों में बदला पाओगे
संभालने वाला बैठा, फिर क्यों चिंता करना
आने वाले हालात से, बिल्कुल भी ना डरना
अच्छा हुआ और हमेशा, अच्छा होता रहेगा
निखरेगा तभी जब, हालात की चोटें सहेगा
आसमान की ऊंचाई, छूकर तुम दिखलाओ
देखना चाहे जैसा खुदा, वैसे ही नजर आओ
-जय श्री
-अभिलाषा देशपांडे
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
10-Dec-2022 08:22 AM
शानदार प्रस्तुति 👌
Reply
Sachin dev
09-Dec-2022 05:49 PM
👍👍
Reply
Mohammed urooj khan
09-Dec-2022 11:20 AM
शानदार 👌👌👌
Reply