लेखनी प्रतियोगिता -11-Dec-2022
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@ *सोरठा छ्न्द* @
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(१)
देख सुहानी भोर , पलकों के उठते हुई ।
किरणों की नव डोर,लगी खींचने सोच को ।।
(२)
तन के भीतर ताप, दिनकर तो भरने लगा ।
श्वास-श्वास में भाप,आग बिना उठने लगी ।।
(३)
सब का भरने पेट, खेतों में कुसिया चले ।
सपने मटियामेट , साहूकारी कर रही ।।
(४)
ऐसे भी मत बोर, विनती कर मटकी कहे ।
भीतर उठता शोर ,मर जाऊँगी ठण्ड से ।।
(५)
छू सरिता का गात,मारुत करता मसखरी ।
ठण्डी - ठण्डी बात, सूरज भी करने लगा ।।
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-अभिलाषा देशपांडे
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Mahendra Bhatt
12-Dec-2022 09:51 AM
शानदार
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Punam verma
12-Dec-2022 08:51 AM
Very nice
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Abhinav ji
12-Dec-2022 07:50 AM
Very nice👍
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