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लेखनी कहानी -23-Dec-2022

यात्रा


बारह मिनट की यात्रा के लिए
बारह घंटे की यात्रा
मैंने उसे देखा जब मैंने उसे देखा
मेरी सांस सांस में आ गई

मैंने दूर से देखा
आंख से भरा किरण पानी
जैसे ही तुम उसे देखते हो, मेरा
कैसे शामिल हों

कोई केली उपहार नहीं मिला
मन मिला
क्या मरया की तंग छड़ी थी 
लेकिन उसके चरित्र पर दाग मत लगाओ

पूछता है कि यह कैसा है
साठ पैसे हुंडका
उसने मुझे भारी मन दिया
वापस भेज दिया

लौटने के रास्ते पर
यह भारी और पावुल था
मैं दूर से देख रहा था
मेरा दिल गुड़िया

-अभिलाषा देशपांडे

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4 Comments

Gunjan Kamal

23-Dec-2022 05:43 PM

बहुत खूब

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Sachin dev

23-Dec-2022 04:59 PM

Nice 👌

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Varsha_Upadhyay

23-Dec-2022 02:29 PM

शानदार

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