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लेखनी कहानी -23-Dec-2022

शीर्षक- अस्तित्व

 निश्चित है जो 
सब पहले से 
तो फिर मेरा क्या
और तुम्हारा क्या?

अस्तित्व का सुरज 
कब डुब जाये 
मालुम नही

खिडकिया गिनती है
तारो को 
वहम कि रात मे अक्सर 


डुबता है सुरज 
हिस्से के 
बटवारे से

जैसे हम
बट जाते है
त्योहारो मे

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2 Comments

Gunjan Kamal

23-Dec-2022 05:44 PM

शानदार

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Sachin dev

23-Dec-2022 04:58 PM

Nice 👌

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