लेखनी कहानी -24-Dec-2022
(श्री सवैया-8×जगण -121+1दीर्घ-2)
(ॐ प्रां प्रीं प्रों स शनये नम : !)
उमेसहिं रंगु सरीरहिं केरि धरे निलहा त अहैं रबिनंदना ।
बलीमुखु देउ सबै कछु भच्छतु मांसु बिहीनु ज गातहिं रंजना ।
अनीति करै जहु दंडु मिलै बहु ताहि बदे भलु होतु ह बंदना ।
सनी महाराजु प्रसन्नु मना जउ होयिं कृपालु रहै नहिं झंखना ।।
(ॐ जय- हनु हनु हनु हनुमंत लाल जय-जय !)
कृपा तुम्हरी जहु पै बरसै बजरंगबली निभया हुयि जातु ऊ ।
हिया महिं धारि ज पूजतु तोहिं कपीसु बलीसु चहूँ म दिखातु ऊ ।
सिरोमनि हउ प्रभु धर्म सनातनु पालकु हौ भगताँ न डरातु ऊ ।
सँहारकु हौ भलु पापिनु कै सुनि टेरि तुम्हारि न ठाढ़ि भजातु ऊ ।।
सुप्रभातम् !
सीताराम साहू 'निर्मल'
29-Dec-2022 04:34 PM
बेहतरीन
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Abhilasha deshpande
24-Dec-2022 07:15 PM
Nice
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Sachin dev
24-Dec-2022 07:08 PM
Nice 👌
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