लेखनी कहानी -24-Dec-2022
*एक बूंद*
आंसुओं की एक बूंद
गाल पर ओवल ...!
पारी के अश्वेतों से
धीरे पजारला ...!!
मन को धोखा दिया
थोड़ी नमी मिली ...!
पलवी ने नया तोड़ दिया
त्रासदी ने मन बना लिया ....!!
हवा का झोंका
तन मोहरून आया
घना नाभि
धुआँ और जला ....!!
अजीब तूफान
बेंडिश्या हवा
आदत का यह क्षण
क्यों आश्रय हवा ...!!
सुम जीवन किया
कुछ हाथ में डाल दिया
इसे क्यों घटाना है
बाकी पर हाथ के अलावा कुछ नहीं....!!
-अभिलाषा देशपांडे
सीताराम साहू 'निर्मल'
29-Dec-2022 04:35 PM
बेहतरीन
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Muskan khan
24-Dec-2022 07:55 PM
Shandar 🌺👍
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