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लेखनी कहानी -28-Dec-2022

रगण x ४

गीत नवगीत है क्या?  पता ही नही।
हार में जीत है क्या? पता ही नही।

सत्य के भाव मे झूठ बिकते मिले।
पाप के पुण्य में ठूँठ खिलते मिले।
बस कसक ही लिए कट रहा है सफर।
प्रीत की रीत है क्या?पता ही नही।
हार में जीत है क्या? पता ही नही।

अब अमावस लिए चांदनी फिर रही।
सिंहिका सुत सहित रोशनी फिर रही।
सुख सरल भी गरल युक्त साधे असर।
गीतिका गीत है क्या?
पता ही नही।
हार में जीत है क्या? पता ही नही।

नित्य नूतन कलह भोगती देह को।
आत्म संतुष्टियाँ छोड़ती गेह को।
मन प्रलापी खुशी को लगी है नज़र।
शुभ्र संगीत है क्या पता ही नही।
हार में जीत है क्या? पता ही नही।

-अभिलाषा देशपांडे


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3 Comments

बेहतरीन

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VIJAY POKHARNA "यस"

28-Dec-2022 02:32 PM

Excellent

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