Geeta thakur

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पुराना घर

प्रतियोगिता हेतु कहानी लेख
विषय शब्द**पुराना घर**

उम्र हो चली है अब साठ के पार।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत कुछ पीछे छूट गया है। चाह कर भी हम उसे पा नही सकते। वो गलियां चौबारे, हल्ला गुल्ला, सब साथ साथ रहते थे। आज हम इतने तन्हाहो गए।

पुराने घर की यादें ज़हन से बाहर निकलती नहीं, उम्र का इससे कोई लेना देना नहीं होता।

सर्दियों की इस गुनगुनी धूप में बैठी हुई हूं। अपनी घर की क्यारियों की देखभाल कर रही हूं, लेकिन ये मन मस्तिक कहीं भूतकाल में जा रहा है। अपने बचपन में।
शायद याद ना भी आएं यादें पर अकेले तो ये ही सहारा हैं तभी तो कलम से दोस्ती बनाई है और लेखनी शुरु हो जाती है।

पुराने घर को मैं दो भागों में बाटती हूं एक पहला दादा दादी का घर नाना नानी का घर और दुसरा मेरा सुसराल। जहां पर आकर मैंने अपनो जिन्दगी की शुरूआत करी थी।

दादी का घर तो गांव में था।
बांस, खपरेल और कच्ची मिट्टी का प्लास्टर हुआ वा। बहुत सुंदर। कभी गर्मी सर्दी नही लगती थी। चूल्हे की रोटी, ताजा पानी। पेड़ पर झूला। बावड़ी। गाय।
सब साथ साथ रहते थे। बहुत सी यादें जुड़ी हुई हैं।

नाना का घर शहर में था। यहां की बात भी निराली। मामा मामी का बेहद प्यार मिलता, जो आज भी भुलाया नहीं जाता।

आज भी आंतरिक रूप से मैं अपने बचपन के पुराने घर से जुड़ी हूं।

शादी होकर जहां मैं आई, वह मेरे लिए एक महल समान ही था। समय के साथ साथ कब कहां से कहां आ जाता है इंसान, पर पुराने घर को अपने दिल से नही निकाल पाता।

ये सुन्दर यादें ही तो अब जीने की वजह है। इन्सान को कहीं भी उतनी खुशी नहीं मिलती, जितनी उस पुराने कच्चे घर में। प्रदूषण भी नहीं, कोई ए, सी नहीं कुलर भी नहीं। होता था। संतोष दिलों में अपार था। अब एक होड़ प्रतिस्पर्धा लगी हुई है कि मैं उससे आगे जाऊं। उसके घर में ये समान है तो मैं भी उसे लाऊंगा। दिल का चैन खो गया है।
पुराना घर सपनों का घर रह गया है।

संस्मरण

गीता ठाकुर दिल्ली से

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8 Comments

Renu

06-Jan-2023 07:04 AM

👍👍🌺

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Gunjan Kamal

05-Jan-2023 08:59 PM

शानदार प्रस्तुति 👌🙏🏻

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Sachin dev

05-Jan-2023 03:54 PM

Well done

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