Geeta thakur

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वो खत वाला जमाना

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वो खत वाला जमाना


📋📝 वह खत लिखने वाला जमाना भी कितना अच्छा था, लंबे इंतजार के बाद एक मिलता था। जज्बातों रूपी शब्द की माला बनाकर कागज पर लिखते थे, फिर उनके उत्तर की प्रतीक्षा में बेसब्री से इंतजार करते थे।
    खत को देने वाला शख्स डर डर कर उसको अपना लिखा खत देता था। जरूरी तो नहीं हरकत मंजिल तक पहुंच जाए ऐसा भी होता था। कभी-कभी कुछ खत लिखे ही रह जाते थे मंजिल तक पहुंचते ही नहीं थे क्योंकि मंजिल का पता उसमें लिखा ही नहीं होता था। बिन पते की रह जाती थी जिंदगी फिर भी उस खत के जवाब का इंतजार रहता था।

अगर आप मान भी लें कि खत लिखा है और उसका जवाब भी आएगा, फिर उसके बाद डाकिए का इंतजार रहता था।
गली में साइकिल की घंटी बजाता हुआ डाकिया आता भाग कर जाते क्या कोई हमारे नाम का भी खत है यह उससे पूछते।

खत भी कई तरीके के होते थे,
पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र। टेलीग्राम का जमाना।
खत में प्यार होता था, लिखने वाले के अहसास उससे जुड़े रहते थे।
कभी कभी हमारी मां कहती की एक खत लिख दो, मेरी बहन का क्या हाल होगा?
हम भी भाव खाते। पहले स्कूल का काम खत्म हो जाए फिर लिखेंगे। बेचारी मां!
चलो अच्छा बताओ क्या लिखना है? बात यहीं से शुरु होती थी कि हम सब राज़ी खुशी से हैं, भगवान के आशीर्वाद से तुम भी सब ठीक होंगे।😊 ये हर बार दो लाइनें जरुरी होती थी।
दूर दूर तक लैंड लाइन फोन नही था, बस डाकिए का इंतजार रहता था।😞।
अब क्या क्या बताएं आपको?
कभी टेलीग्राम आ गया तो भगदड़ मच जाती थी कि क्या हुआ सब खैरियत से हैं।

मेरे पास अपने ही संस्मरण हैं, खत वाले जमाने के। आज भी संभाल कर रखे हैं खत। बहुत ही करीने से सुन्दर से उन्ही लिफाफों में स्ट्रैपलर करके रखें हैं।

ये तो लेखनी के कारण अब उन्हे पड़ नहीं पाते। खत वाले जमाने की बात, उसमे लिखने वाले के जज्बात और प्यार भरा होता है।
एक एक शब्द मोती की तरह माला बनाकर कागज पर लिखकर सजाया हुआ। वो बात अब नहीं है।
लेटर पैड भी बहुत सुन्दर हैं मेरे खतों के 😊।
फिर जब हम एक दुसरे को खत लिखते थे तो जाहिर है उसका इन्तजार भी बहुत रहता था। कोई गली में साइकिल पर घंटी बजाता तो समझ जाते कि डाकिया डाक लाया है। हम भी भाग कर पूछते कि हमारी डाक आई है क्या?
सच कहूं दोस्तो वो जमाना बहुत सुंदर था।
आज भी हम दोनो के खत अलमारी में रखे हुए हैं संभाल कर। पता नही बाद मे उनका क्या होगा? अभी तो वो यादें हैं, जो आजकल के मोबाइल फोन में कुछ नही। कभी भी सब डाटा उड़ जाता था। चाहे कितना भी सेफ कर लो। चोरी हो जाते हैं। कुछ भी! ये टैकनौलिजी अच्छी भी है और! इसी के कारण हम आप जुड़े हुए हैं।

सासु मां भी सभी को खत मुझसे ही लिखवाती थी। वो उसमें प्यार बना हुआ रहता था। सास बहू एक साथ मिलकर अपनी बाते शेयर करते।
वो खत वाला जमाना वाकई बहुत दिल वाला होता था।

गीता ठाकुर दिल्ली से
ज्यादा अब मैं चर्चा नहीं करूंगी।

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5 Comments

Gunjan Kamal

05-Jan-2023 08:33 PM

शानदार प्रस्तुति 👌

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Raziya bano

05-Jan-2023 06:32 PM

Nice

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👌🏻kya bat hai. Ap bhi apna time vaise hi enjoy ki hai jaise hum apna bchpn🥰 accha sansmaran hai.

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