गज़ल
कोन सा दर था हमें जिस से भगाया न गया
बाद तेरे हमें सीने से लगाया ना गया
फिर किसी बज़्म में भूले से बुलाया ना गया
हमसे शाहों का क़सीदा जो सुनाया ना गया
इक ज़माना हुआ बिछड़े हुए तुझसे लेकिन
आज तक प्यार तिरा हमसे भुलाया न गया
हमने पाया है विरासत में हुसैनी जज़्बा
जुल्म के सामने सर हमसे झुकाया ना गया
रो दिए याद मुहब्बत का ज़माना करके
हिज्र की रात का जब बोझ उठाया ना गया
सात हज पुश्त पे बैठाके कराये फिर भी
क़र्ज़ माँ का कभी बेटे से चुकाया ना गया
प्यार की एक निशानी थी सो "नाज़िम" हमसे
किसी सूरत कोई खत उनका जलाया न गया
नाज़िम मुरादाबादी✍︎
Aliya khan
10-Jan-2023 01:13 AM
BAhut khoob
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Nazim Moradabadi
21-Feb-2023 07:04 PM
Behad shukriya
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Simran Bhagat
09-Jan-2023 01:58 PM
👍🏻👍🏻
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Nazim Moradabadi
21-Feb-2023 07:05 PM
Thxxx jiiii😊
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