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लेखनी कहानी -17-Jan-2023

ओस की बूंदे 
मेघो से आई 
एक बूंद 
भिगो गई वो तन मन को
और मेघ ने कहा तुम हो कहा

ओस की बूंदे आती है
    धरापर और धरा 
      महक जाती है

मेघ और धरती पर
का हो जाता है
मिलन और भीग जाते है
दोनो के तन मन

बूंदे करती है पावन धरा को
हरियाली बिखरती है
चारो और को 
-अभिलाषा देशपांडे

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4 Comments

Babita patel

20-Jan-2023 03:25 PM

beautiful

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Swati chourasia

18-Jan-2023 12:11 PM

बहुत खूब

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Renu

18-Jan-2023 11:10 AM

👍👍🌺

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