रहीमदास जी के दोहे

59 Part

321 times read

1 Liked

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय।।  अर्थ— रहीमदास जी कहते हैं कि यदि विपत्ति कुछ समय की हो तो वह ...

Chapter

×