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ताबीज मन को गहरा आघात लगा था। स्थिति अनुकूल न होकर प्रतिकुल हो गयी थी। मन को मसोसने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। वह रह-रह कर अपने ...