इश्क़ ही मज़हब मेरा

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2122-2122-2122-212 इश्क ही मज़हब मेरा, मेरी इबादत है तो है, यार का सज्दा अगर रब से बगावत है तो है//1 क्या बिछड़ना और मिलना जिंदगी की राह में, हिज्र का ग़म ...

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