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पहले कह चुका हूँ कि यह मनुष्य बात कहना खूब जानता था। इस दफा उसने बात कहना शुरू किया! ऑंखों की पुतलियाँ और भौहें, कभी सिकोड़कर और कभी फैलाकर, कभी बुझाकर ...