1 Part
356 times read
9 Liked
अफसोस अपनी तो हर एक मोहब्ब्त ही बेपनाह रही दोस्ती हो या चाहत सामने से लापरवाह रही हमने जब खोल कर रख दिये जख्म अपने महफ़िल में हर ओर से बस ...