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राजलक्ष्मी की दोनों ऑंखें आनन्द से चमक उठीं। बोली, “तो चलो, पर मन ही मन देवता की अवज्ञा तो नहीं करोगे?” जवाब दिया, “शपथ तो नहीं ले सकता, परन्तु तुम्हारा रास्ता ...