ये मंजिल

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ये मंजिल सूरज की किरणों के साथ निकलता हूं हर रोज ढलते शाम के साथ लौटता हूं हर रोज। कभी कभी बादलों में ये सूरज और मुश्किलों में दब जाता हूं ...

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