श्रृंगार छंद

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काम कमान तनी भोये,  रति नैन लगे जैसे मीठी कटारी,, भिक्षा द्वार पे मांग रहे, कामदेव खड़े हो बन के भिखारी,, सृष्टि रति मे रति सृष्टि मे, जीव जगत को सत्य ...

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