कविताएं

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मुझे हर हाल में बक्से गए उजाला अपना चाँद रिश्ते में नहीं लगता है मामा अपना। मैंने रोते हुए किसी दिन पोछे थे आँशु मुदतो माँ न नहीं धोया दुपट्टा अपना। ...

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