कविताएं

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नजर बीरान है मेरी अभी तक तेरी रिक्शा नहीं गुजरी अभी तक. कसम देना नहीं छोड़ा किसी ने मेरी सिगरेट नहीं छूटी अभी तक। बहुत बूढी है खामोसी हमारी मगर ऊँचा ...

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