कविताएं

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धुप में निकलो घटाओ में नहाकर देखो ज़िंदगी क्या है किताबो हटाकर देखो। सिर्फ आँखों से ही दुनिया नहीं देखि जाती दिल की धरकन को भी बिनाई बनाकर देखो। पत्थरो में ...

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