कविताएं

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अपने घरो को दरों दिवार सजाकर देखो। वो सितारा है चमकने दो यु ही आँखों में क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो। फासला नजरो का धोखा भी तो हो सकता ...

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