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द्वारिका नगरी के द्वारे पर, पुछत हरि को धाम सुदामा,, पांव मे जूती न सर पे पगड़ी, पुछत नाम बताओ सुदामा,, द्वारपाल से बोले विनय कर, बंधू ये संदेशा पहुंचा दो,, ...