चोटी की पकड़–58

121 Part

40 times read

0 Liked

जमादार जटाशंकर ख़ज़ाने आए। वहाँ से मालखाने गए। रुस्तम की वर्दी पहनी। बाक़ी रहा थोड़ा समय पहरा देने लगे। पहरा बदला। दूसरे सिपाही आए। बात फैली कि रुस्तम जमादार हो गया। ...

Chapter

×