चोटी की पकड़–96

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तीस रुस्तम बुआ को लेकर चला। रात के दस के बाद का समय। गढ़ सुनसान। मर्दाना बाग़ से चला। बुआ को शंका हुई। फिर मिट गई। "देखती हो दो तलवारें हैं?" ...

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