बंजारों

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बंजारों सा जीवन जीना मुझको और गवारा कब है!  नैया है मंझधार मे मेरी दिखता मुझे किनारा कब है!  जिसको सबसे ज्यादा चाहा,जिसको सबसे ज्यादा माना!  उम्मीदें थी जिससे मुझको उसका ...

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