1 Part
297 times read
5 Liked
बंजारों सा जीवन जीना मुझको और गवारा कब है! नैया है मंझधार मे मेरी दिखता मुझे किनारा कब है! जिसको सबसे ज्यादा चाहा,जिसको सबसे ज्यादा माना! उम्मीदें थी जिससे मुझको उसका ...