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अश्क--दो शब्द ये अश्क कमीने कहां मानते हैं, आंखों की कोरों से बहते हैं चुपके - लाख छुपायें दास्ताँ - ए-दिल भी, कह देते सब कुछ ये बह कर छुपके- कभी ...