छोटे-छोटे सवाल (उपन्यास): दुष्यन्त कुमार

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“जी हाँ ।" राजेश्वर ने कहा। फिर मुस्कराकर सम्बन्धों की निकटता बढ़ाने की गर्ज़ से बोला, “कोई गुनाह तो नहीं है गाँव का होना ?" “गुनाह है साहब, बिलकुल गुनाह है।” ...

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