1 Part
89 times read
19 Liked
शीर्षक -ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे संसार है एक सुंदर सृजन, बसे इसमें दुख-सुख और आंनद। जहां मिले शांति हृदय को, ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक ...