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शिव द्रोही जब दक्ष हुए , महादेव न रूष्ट हुए,, दिया निमंत्रण दसों दिशा में, क्यो वह पुत्री को भूल गए,, चले सभी महमान चले है, ऋषि मुनि गन्धर्व चले है,, ...