तलवार उठाओ, द्रोपदी, इस बार बचाने गोविंद नहीं आएंगे,

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छोडो मेहँदी खडक संभालो, खुद ही अपना चीर बचा लो, द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे, सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे! कब तक आस लगाओगी तुम, ...

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