गाँव का सफर

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(पहले  कितने हसीन थे)   कच्ची दीवारों पर छप्पर पड़े थे... थे घर छोटे छोटे पर दिल के बड़े थे...   वो आमों की बगीयां वो सावन के झूले.. वो कपड़े ...

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