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4) कई दिनो से चूल्हा रोया चक्की रही उदास सर्दी गर्मी बरसात का न कभी होता भान। सुबह उठकर चल देता मजदूर अपने काम।। दिन भर कठिन परिश्रम करता फिर भी ...