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चलो उतारे आरती, माँ भारती की आरती। लहर लहर ध्वजा कहे, उमड़ उमड़ लहू कहे। शिखर हिमालय का कहे,धरा कहे गगन कहे। गंगा स्वयं जिस के है, चरण सदा पखारती। चलो ...