दिल और शीशा

1 Part

192 times read

9 Liked

दिल और शीशा जुड़ जाता है टूटा शीशा, कभी नहीं दिल जुड़ता है। बंद हुआ जो द्वार हृदय का, नहीं कभी वह खुलता है।। कोमल-कोमल तार हृदय के, बड़े लचीले होते ...

×