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दिल और शीशा जुड़ जाता है टूटा शीशा, कभी नहीं दिल जुड़ता है। बंद हुआ जो द्वार हृदय का, नहीं कभी वह खुलता है।। कोमल-कोमल तार हृदय के, बड़े लचीले होते ...